अपील: जनगणना के दौरान प्रदेशवासी अपनी मातृभाषा ‘छत्तीसगढ़ी’ दर्ज कराएं…क्यों पढ़ें पूरी खबर!

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जनगणना के दौरान प्रदेशवासी अपनी मातृभाषा ‘छत्तीसगढ़ी’ दर्ज कराएं: गजेंद्ररथ गर्व

जनगणना 2026 की शुरुआत मई की पहली तारीख से होने जा रही है, इसे लेकर खास कर तमाम छत्तीसगढ़ियों को सजग रहना चाहिए, ऐसा कहना है प्रदेश की सबसे बड़ी गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश प्रवक्ता गजेंद्ररथ गर्व का, दरअसल यह मौका है तमाम छत्तीसगढ़ियों को अपनी भाषाई पहचान जनगणना के माध्यम से अक्षुण करने का, जनगणना में मातृभाषा के कॉलम में छत्तीसगढ़ी दर्ज कर!

गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना लंबे समय से मातृभाषा छत्तीसगढ़ी की लड़ाई लड़ रहा है, इस क्रम में संगठन की महिला विंग प्रमुख लता राठौर द्वारा अपनी टीम के साथ दिल्ली में राष्ट्रपति से भेंट कर जंतर मंतर में आंदोलन करना शामिल रहा है।
राजभाषा मंच के प्रांतीय संयोजक नंदकिशोर शुक्ल भी लगातार मातृभाषा के लिए आंदोलित हैं, पिछली बार शीत सत्र में पुराने विधानसभा भवन के अंतिम दिन श्रीशुक्ल और गजेंद्ररथ ने विधानसभा कार्रवाई के दौरान सभी विधायकों से मिलकर छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने आह्वान किया था।


छत्तीसगढ़ प्रदेश अपनी चिरपरिचित भाषा छत्तीसगढ़ी के लिए जानी जाती है पर पृथक राज्य निर्माण के बाद राज्य की राजभाषा को अभी तक मातृभाषा निर्माण के क्रम में आठवीं अनुसूची में अंकित नहीं किया जाना छत्तीसगढ़ की भाषाई पहचान के साथ खिलवाड़ है।

प्रदेश की सबसे बड़ी गैर राजनीतिक संगठन के साथ ही कई अन्य संगठन भी लगातार राजभाषा छत्तीसगढ़ी को न्याय दिलाने भरकस कोशिश कर रहे हैं, जिनमें कलाकार, साहितकर, फिल्मकार और लोकविधा से जुड़े लोग शामिल हैं।
छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्ररथ ने प्रण लेकर लंबे समय तक खुल्ला पांव रहना स्वीकारा था जिसे कांग्रेस शासन में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चरण पादुका पहनाकर भाषाई अस्मिता के लिए वचन दिया था पर अब उनकी सरकार नही है ऐसे में बीजेपी सरकार इस जिम्मेदारी को निभायेगी ऐसा भाव जनमानस में है और इसी विश्वास के साथ छत्तीसगढ़िया महिला क्रान्ति सेना के नेतृत्व में लता राठौर और उसकी टीम छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और सभी सांसदों से मिलकर मातृभाषा छत्तीसगढ़ी के मान को सिरमौर बनाने कमान संभालेंगी।

आने वाले दिनों में भाषा के लिए प्रदेशवासियों संग मिलकर बड़े आंदोलन की रूपरेखा संगठन बना रही है।
भाषाई अस्मिता के लिए उम्र खपा देने वाले 88 वर्षीय नंदकिशोर शुक्ल का कहना है की प्रदेशवासियों की तो छोड़िए सत्ता में बैठे छत्तीसगढ़िया नेता मंत्री सांसद भी छत्तीसगढ़ी राजभाषा को लेकर उदासीन हैं फलस्वरूप आजतक भाषाई पहचान के लिए छत्तीसगढ़ महतारी तरस रही है।
लता राठौर कहती हैं की जब तक जनमानस के बीच से इस बात की तैयारी नही कर ली जाएगी की हमें हमारी भाषाई पहचान अक्षुण करनी है तब तक छत्तीसगढ़ी को अपनी पहचान के लिए लड़ना होगा और यह लड़ाई अब अंतिम चरण में है, क्योंकि जन जागरुकता आ चुकी है।

वहीं पत्रकार गजेंद्ररथ का कहना है की, जनगणना एक सही समय और आखरी चोंट हो सकती है, उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से अपील की है, मातृभाषा के कॉलम में छत्तीसगढ़ी अंकित करें, अगर छत्तीसगढ़ी का ऑप्शन न भी हो तब भी खुद से छत्तीसगढ़ी दर्ज कराएं।
इस बार एक एप के माध्यम से जनगणना होनी है जानकारी लेने पर यह नही स्पष्ट हो पाया है की मातृभाषा के कॉलम में छत्तीसगढ़ी ऑप्शन होगा या नहीं या फिर सीधा दर्ज किया जा सकेगा!

ऐसे में सभी प्रदेशवासी सतर्कता और जागरूकता से जनगणना संपन्न करें और अपने मातृभाषा कॉलम में छत्तीसगढ़ी अंकित करें, इससे एक बड़ा संदेश जनगणना के माध्यम से केंद्र सरकार को जायेगा और छत्तीसगढ़ी राजभाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की प्रक्रिया सरल हो पाएगी।

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