“वाह रे भारत कि आजादी” कोतबा कि रहने वाली शैली गुप्ता की एक खुबसूरत कविता, एक बार जरुर पढ़े

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आज कल लड़कियों के साथ हो रही घटनाओ को सुनकर तो सभी लोग मोमबत्ती लेकर घर से बहार निकल जाते है लेकिन कुछ दिनों बाद सभी भूल जाते है बस इसी वजह से कोतबा कि रहने वाली शैली गुप्ता जिनका ससुराल गुमला में है उन्होंने “वाह रे भारत कि आजादी” नाम से आज समाज को एक कविता के माध्यम से यह समझाने कि कोशिश कि है कि लड़कियों के साथ साथ समाज को और लड़को को भी बदलने कि आवश्यकता है उन्होंने अपनी कविता में समझाया है कि घरों में अगर लड़को को अच्छी शिक्षा मिले और उनका देखने का नजरिया सुधर जाये तो लड़किया घटनाओ का शिकार नही होंगी।

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